भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन निर्माण के लिए पेड़ों के कटान के विरोध में बुधवार को स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में नारे लगाए और जनगीतों के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।
बुधवार शाम करीब 4 बजे बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी जीएमएस रोड स्थित एनएचएआई कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। ऋषिकेश-भानियावाला के बीच पेड़ों के कटान के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि ऋषिकेश और देहरादून के बीच यातायात की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सड़क को चौड़ा करने की कोई विशेष आवश्यकता दिखाई नहीं देती।
उनका तर्क था कि जब इस मार्ग पर नियमित रूप से गंभीर जाम की स्थिति नहीं बनती, ऐसे में हजारों परिपक्व पेड़ों की कटाई उचित नहीं ठहराई जा सकती। अनूप नौटियाल ने कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले निर्णयों पर पुनर्विचार होना चाहिए। इस हाईवे को चौड़ा करने की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है।
मयंक दत्ता ने कहा कि जब उन्होंने इस परियोजना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों और स्वीकृतियों की छानबीन की, तो पता चला कि इस सड़क को बनाने के लिए दिए गए सरकारी तर्क में वीआईपी मूवमेंट को मुख्य आधार बनाया गया है। कहा कि महज कुछ वीआईपी लोगों के आवागमन की सुविधा के लिए 4 हजार से अधिक परिपक्व पेड़ों की बलि दी जा रही है।
पर्यावरण कार्यकर्ता हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि यह क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक आवास और आवाजाही का महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 के मधुमलाई फैसले में हाथी कॉरिडोर के संरक्षण पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। ऐसे में पेड़ों की कटाई में जल्दबाजी उचित नहीं है। पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान इरा चौहान, लोकेश ओरी, भीम पाली, विजय भट्ट आदि मौजूद रहे।