हल्द्वानी के गौलापार-तीनपानी बाईपास पर स्कॉर्पियो की टक्कर से अंशु आर्या की मौत हो गई। वह घर का इकलौता बेटा और एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। पिता का पहले ही निधन हो चुका था, तीन बहनों में से दो की शादी हो चुकी है और एक कुंवारी है।
हल्द्वानी के गौलापार-तीनपानी बाईपास पर स्कॉर्पियो की टक्कर से जान गंवाने वाला अंशु आर्या घर का इकलौता बेटा था। घर में तीन बहनों में से दो की शादी हो चुकी है। पिता पहले ही गुजर गए थे। अंशु एक फैक्टरी में काम कर परिवार चलाता था।
अंशु के जीजा बादल ने नम आंखों से बताया कि दो महीने पहले ही छोटी साली की शादी की थी। उसकी शादी में बहुत कर्ज हो गया है। अंशु कहता था टेंशन मत लो, मैं हर महीने किस्त भर दूंगा। शनिवार को तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने सब कुछ खत्म कर दिया। घर में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा। घर में बूढ़ी मां और एक कुंवारी बहन। कर्ज, घर का खर्च और अब सब कुछ अंधकार में है। मां एक प्राइवेट स्कूल में आया का काम करती हैं। मामूली तनख्वाह पर घर चलाना मुश्किल था, इसलिए अंशु ही सहारा था। मां पर घर और कर्ज दोनों की जिम्मेदारी आ गई है।
बेटा कहता था, मां अब तुम आराम करना
अंशु की मां को जब खबर मिली तो बेहोश हो गईं। होश आया तो बस एक ही रट, मेरा बेटा कहां है? पड़ोसी बताते हैं कि अंशु बहुत मिलनसार था। मां और घर की खूब चिंता करता था। मां से कहता था कि कर्ज की चिंता मत करो, मैं सब ठीक कर दूंगा। आज उसी मां को बेटे के गम के साथ कर्ज के बोझ की दोहरी मार पड़ी है।
तीन दोस्त एक फैक्टरी में थे
गौलापार-तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर पर शनिवार रात हुई दुर्घटना ने चार गरीब परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। बदायूं और बहेड़ी से रोजी-रोटी के लिए यहां परिवारों के बेटे आपस में दोस्त थे। राहुल, अंशु और शिवम हल्दूचौड़ स्थित एक फैक्टरी में काम कर परिवार का सहारा बने थे। आदित्य पढ़ाई कर रहा था और आगे बढ़ने के सपने देख रहा था। चारों के जाने से घरों में कोहराम मच गया है।
बहनों की शादी का सपना अधूरा छोड़ गया राहुल
शेरगढ़ बहेड़ी से आकर हल्द्वानी की एक फैक्टरी में नौकरी करने वाला राहुल दो भाइयों में सबसे छोटा था। घर में पिता, मां, बड़ा भाई रामपाल और दो बहनें हैं। पिता गौला नदी में मजदूरी करते हैं। बड़ा भाई रामपाल एक दुकान में काम करता है। राहुल भी एक फैक्टरी में काम करने लगा था।
रामपाल ने बताया, राहुल कहता था हम सब मिलजुल कर दो बहनों की शादी कराएंगे। मां बेटे की याद में आंसू बहा रही है। पूरा परिवार गमगीन है। पिता भी मजदूरी पर नहीं गए। भाई रामपाल का कहना है कि पूरे परिवार को राहुल से काफी उम्मीदें थीं। सब कुछ पलभर में बदल गया। उन्होंने बताया कि भाई की मौत से माता-पिता टूट गए हैं। बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, शिवम के भाई आकाश पेंट की दुकान में काम करते हैं। माता-पिता भी गौला में मजदूरी करते हैं। आकाश ने कहा, शिवम कहता था मम्मी-पापा को अब काम नहीं करने दूंगा।
मां-बहन का सहारा और इकलौता वारिस खोने का गम रहेगा उम्रभर
11 जुलाई की रात काल के गाल में समाए शिवम, आदित्य, अंशु और राहुल का परिवार इस सदमे को ताउम्र नहीं भुला पाएगा। दर्दनाक सड़क हादसे ने एक ही झटके में किसी मां का सहारा तो किसी बहन का साथ और किसी ने इकलौता वारिस खो दिया।
बाबूराम का सबसे छोटा पुत्र शिवम होनहार था। बाबूराम मजदूरी के साथ ही बंटाईदार का काम करते हैं। मूल रूप से बाबू राम रेहपुरा गांव थाना बिनावर बदायूं यूपी के रहने वाले हैं लेकिन वर्षों से यहां हरिपुर तुलाराम में रहकर परिवार चला रहे हैं। परिवार में पत्नी और तीन पुत्र हैं। बड़ा बेटा बचपन से ही विकलांग है। मझला बेटा पेंटर है। वह शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने गांव ले गए। हादसे में मारे गए आदित्य की मौत से परिवार टूट गया है। पढ़कर लिखकर उसे काबिल बनाने के लिए बियरशिवा में दाखिला दिलाया था। वह 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता रवींद्र प्रसाद टम्टा लोनिवि से रिटायर इंजीनियर हैं। परिवार में पत्नी, एक बेटा और तीन बेटियां हैं, आदित्य सबसे छोटा था। आदित्य के पोस्टमार्टम के दौरान हरिपुर तुलाराम के प्रधान समेत तमाम ग्रामीण मौजूद रहे। दोपहर बाद उसकी अंत्येष्टि रानीबाग चित्रशिला घाट पर की गई।