गंगा चेतावनी रेखा से 25 सेंटीमीटर ऊपर, त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन आरती स्थल जलमग्न
चेतावनी रेखा से 25 सेमी ऊपर बह रही गंगाऋषिकेश। पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा उफान पर है। बढ़ते जलस्तर के चलते प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन का आरती स्थल पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा का जलस्तर 339.90 मीटर पर पहुंच गया है, जो चेतावनी रेखा से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। त्रिवेणी घाट, ढालवाला और स्वर्गाश्रम क्षेत्र के बाजारों में सन्नाटा पसरा है और दुकानदारों ने एहतियातन दुकानें बंद कर दी हैं। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद डीएम के आदेश पर गंगा किनारे स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार मुनादी कर लोगों से गहरे पानी में स्नान न करने और सेल्फी लेने से बचने की अपील की जा रही है। गंगा किनारे बसे निचले इलाकों के लोगों को भी सतर्क किया जा रहा है। एसडीएम कुमकुम जोशी ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है।
गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे बार-बार हो रहे बंद
लगातार बारिश ने उत्तरकाशी जिले में जनजीवन और यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा और पत्थर गिरने से मार्ग बार-बार बंद हो रहे हैं। कई स्थानों पर यात्रियों और कांवड़ियों को जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करना पड़ा। जिले की 13 सड़कें अब भी बाधित हैं।
जिलाधिकारी निरीक्षण करें
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें, संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी हुई है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। मौसम की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए। यदि अत्यधिक वर्षा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी क्षेत्र में भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण संचार व्यवस्था बाधित होती है तो वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय की जाए। उन्होंने सभी सैटेलाइट फोन को हर समय क्रियाशील स्थिति में रखने तथा प्रतिदिन उनके माध्यम से एसईओसी एवं डीईओसी के बीच संपर्क सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, एससीईओ क्रियान्वयन राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, ड्यूटी ऑफिसर कलम सिंह चौहान, भवानी राम आर्या आदि उपस्थित रहे।