
चौफुला-कठघरिया मार्ग पर रविवार को रेत के ढेर में शव मिलने से सनसनी फैल गई। काम में लगे मजदूरों ने जैसे ही रेत हटाई तो उसमें से सिर और हाथ दिखाई दिए। सूचना पर पहुंची पुलिस की मौजूदगी में शव को निकाला गया।

दो वक्त की रोटी के लिए घर से निकला पवन को किसी की लापरवाही ने वापस आने का मौका नहीं दिया। डंपर से गिरने वाली रेत को बचाने की कोशिश में उसकी सांसें फिसल गईं। रेत के भारी ढेर के नीचे दबा पवन हर सांस के साथ मौत से लड़ता रहा लेकिन आखिर में उसकी जिंदगी की डोर टूट गई।
लालकुआं निवासी पवन सिंह रोजाना की तरह रविवार को भी मेहनत-मजदूरी के लिए घर से निकला था। उसे अंदाजा भी नहीं था कि जिस डंपर और जिस रेत के साथ वह रोज अपना पसीना बहाता है वही रेत उसकी मौत की वजह बन जाएगी। खतरे से अनजान पवन जब डंपर से रेत गिरने से बचाने के लिए उसके कोनों पर कट्टे लगा रहा था। तभी जेसीबी मशीन के चालक ने बिना देखे ही डंपर पर रेता डाल दिया। पवन संभल पाता इससे पहले ही और रेता आ गया। वह उसमें दब गया और कुछ ही मिनटों में डंपर भर गया। उपखनिज के बोझ के नीचे दबे पवन ने खुद को बचाने के लिए हाथ-पैर मारे होंगे लेकिन बरसात में नमी लिए रेता के आगे उसकी एक न चली और अंत में उसकी मौत हो गई।
काश किसी ने देख लिया होता
30 साल के नौजवान की रेत में दबने से हुई मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। हर किसी के जुबान पर बस यही बात है कि डंपर को लोड करते समय अगर उसमें झांक लिया होता या डंपर का चालक भी तलाश करता तो शायद पवन की जान बच सकती थी।
मजदूरों की निकलीं चीखें


