Dharali Disaster: तबाही के एक साल बाद भी 25 फीट मलबे में दफन कल्प केदार मंदिर, गांव में पसरी वीरानी !

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गत वर्ष 5 अगस्त 2025 को आई आपदा में यह प्राचीन मंदिर मलबे में दब गया। सावन माह में भगवान शंकर के इस मंदिर में श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की भीड़ रहती थी।

धराली आपदा के एक वर्ष बाद भी कल्प केदार मंदिर मलबे में दबा है। करीब पच्चीस फीट मलबे के नीचे दबे इस मंदिर की खोज के लिए ठोस कदम नहीं उठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम देवता समेश्वर देवता ने 5 अगस्त 2026 तक कुछ भी करने से मना किया है।

गत वर्ष 5 अगस्त 2025 को आई आपदा में यह प्राचीन मंदिर मलबे में दब गया। सावन माह में भगवान शंकर के इस मंदिर में श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की भीड़ रहती थी। आपदा के बाद मंदिर समिति ने एनडीआरएफ की मदद से इसकी स्थान तलाशी। उस आधार पर 5 अगस्त 2025 से वहां एक हनुमान झंडी स्थापित है। लगभग जून 2026 में स्थानीय युवाओं ने स्वच्छता के लिए लकड़ी के खंभे और झंडे लगाए। मंदिर को मलबे से निकालने के लिए ग्रामीणों ने समेश्वर देवता की देवडोली की अनुमति ली।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, देवता ने 5 अगस्त 2026 तक खोदाई से मना किया है। कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने भी देवता के निर्देश की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूरा होने के बाद दोबारा देवता से पूछा जाएगा।

डीएम ने पुनरुद्धार के निर्देश

बीते शुक्रवार 30 जुलाई 2026 को धराली में बहुउद्देशीय शिविर हुआ। जिलाधिकारी ने जिला पर्यटन अधिकारी को मंदिर के पुनरुद्धार के लिए कार्रवाई के निर्देश दिए। यह निर्देश तब आए हैं जब ग्रामीणों को देवता की अनुमति का इंतजार है। बगोरी गांव के लोगों ने 1 अगस्त 2026 को वहां कीर्तन-भजन का आयोजन किया। उन्होंने जल्द ही भगवान के दर्शन की मनोकामना भी की।

मंदिर का महत्व

कल्प केदार मंदिर भगवान शंकर का एक प्राचीन मंदिर है। यह सावन माह में श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान था। आपदा के बाद से मंदिर स्थल पर चारों ओर मलबा पसरा है। मंदिर अभी भी करीब पच्चीस फीट मलबे के नीचे दबा है।

 


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