
अब उत्तराखंड के गांवों में बारिश का आंकड़ा अनुमान से नहीं, बल्कि आधुनिक मौसम उपकरणों से दर्ज किया जाएगा। इससे मौसम की सटीक जानकारी के साथ किसानों को खेती और फसल नुकसान के आकलन में भी मदद मिलेगी।
राज्य के 7184 गांवों में होने वाली बारिश का सटीक रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग से आटोमैटिक रेन गेज (स्वचालित वर्षामापी यंत्र) लगाए जाएंगे। साथ ही हर ब्लॉक में आटोमैटिक वेदर स्टेशन भी स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 73 लग चुके हैं। यह कार्य सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने विंड्स योजना लागू की है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर मौसम का सटीक डाटा एकत्र करना है। इसका उपयोग कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए किया जाएगा। योजना को तीन चरणों में पूरा करने की तैयारी है। पहले चरण में 95 ब्लॉक में आटोमैटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) लगाए जाने हैं।
इनमें से 73 जगहों पर यह काम पूरा हो चुका है और डाटा भी मिलना शुरू हो गया है। दूसरे चरण में 799 स्थानों पर वर्षामापी और आर्द्रता यंत्र लगेंगे। साथ ही 7184 गांवों में स्वचालित वर्षामापी यंत्र लगाने की योजना है। इससे संबंधित गांवों में बारिश का पैटर्न और डाटा उपलब्ध हो सकेगा।

