उत्तराखंड की हेली सेवाओं पर सख्ती, हर उड़ान में दो पायलट रखना जरूरी !

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हेली हादसे के बाद उत्तराखंड में चारधाम चार्टर्ड सेवाओं के संचालन को लेकर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सख्त की जा रही है। नए नियमों के तहत उड़ान से जुड़ी जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं हादसे का शिकार हुई कंपनी की सेवाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

उत्तराखंड में संचालित होने वाली चारधाम चार्टर्ड हेली सेवाओं में अब पायलट के साथ को-पायलट भी होंगे। वहीं, हर फ्लाइट के बाद पायलट को अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण(युकाडा) को भेजनी होगी। हेली हादसे के बाद शनिवार को हुई डीजीसीए-युकाडा की उच्च स्तरीय बैठक में ये अहम फैसले लिए गए। उधर, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम ने शनिवार को घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की।

अभी तक चार्टर्ड हेली सेवाओं में केवल पायलट उड़ान भरते हैं। अब तय किया गया है कि अब पायलट के साथ को-पायलट भी होंगे। वहीं, पायलट का भी उड़ान को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं होती थी लेकिन अब हर उड़ान के बाद पायलट को अपनी रिपोर्ट युकाडा को भेजनी होगी। ये नए नियम दो नवंबर से प्रदेश में लागू होंगे। बैठक में जिस हेली कंपनी ट्रांस भारत का हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ है, उसकी सभी उड़ानों पर रोक लगा दी गई है।

ट्रांसभारत की जौलीग्रांट एअरपोर्ट से चारधाम चार्टर्ड हेली सेवा के अलावा गुप्तकाशी से केदारनाथ के बीच भी हेली सेवा संचालित होती है। युकाडा के सीईओ प्रतीक जैन ने बताया कि उड़ान पर रोक लगने के बाद इसके जो भी यात्री बुक हैं, वह दूसरी कंपनियों की हेली सेवाओं में समायोजित किए जाएंगे। बाकी कंपनियों की हेली सेवाएं शनिवार को सुचारु रहीं।

जांच टीम ने की मौके पर पहुंचकर पड़ताल

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो और डीजीसीए की टीम शनिवार को चमोली स्थित दुर्घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने मौके से जरूरी जानकारी जुटाई। हादसे में ब्लैक बॉक्स की भी तलाश की। फिलहाल टीम चमोली में ही रुकी हुई है। लौटने के बाद जांच पूरी करके डीजीसीए को अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद ही हादसे के मुख्य कारणों का पता चल सकेगा।


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