
पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उच्च शिक्षा के संस्थानों की स्थापना के नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था से पहाड़ों में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की राह पहले के मुकाबले अधिक व्यावहारिक होने की उम्मीद है।

उत्तराखंड में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को आसान बनाने के लिए सरकार ने भूमि संबंधी मानकों में बदलाव को मंजूरी दी है। धामी कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित नीति एवं मानकों में संशोधन को स्वीकृति दी है। इसका लाभ विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय स्थापित करने के इच्छुक संस्थानों को मिलेगा।
संशोधित व्यवस्था के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय के लिए न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र जरूरी होगा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में यह सीमा 20,000 वर्गमीटर निर्धारित की गई है। सरकार का मानना है कि भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्मित क्षेत्र का प्रावधान विश्वविद्यालयों की स्थापना को अधिक व्यावहारिक बनाएगा।
वर्तमान व्यवस्था में पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के लिए 2.5 एकड़ भूमि पांच किलोमीटर की परिधि में अधिकतम तीन स्थानों पर और मैदानी क्षेत्रों में 10 एकड़ भूमि का मानक है। कैबिनेट ने भूमि के स्थान पर निर्मित क्षेत्र को आधार बनाने का निर्णय लिया है।

