उत्तराखंड: दिवाली की चमक के बीच वन्यजीवों पर संकट, धन की चाहत में वन संपदा पर वार !

Share Now

दिवाली के दौरान उल्लू की पूजा से धन-संपदा बढ़ने के अंधविश्वास के चलते वन्यजीवों के अवैध शिकार और कारोबार का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव ने वनाधिकारियों को पत्र जारी कर उल्लुओं और अन्य निशाचर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ाने समेत जरूरी निर्देश दिए हैं।

दिवाली करीब आने के साथ ही एक बार फिर वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है। वन्यजीवों से जुड़े कई अंधविश्वास हैं, इसको देखते हुए वन मुख्यालय ने उल्लू और दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वनाधिकारियों को पत्र भेजते हुए गश्त बढ़ाने समेत कई निर्देश दिए हैं।

उल्लू और धन का संबंध

अंधविश्वास है कि दिवाली के समय उल्लू से जुड़ी पूजा की जाए, तो धन, संपदा बढ़ती है। इसी धन बढ़ोतरी की उम्मीद में कुछ लोग उल्लू के लिए मनमाफिक राशि देने को तैयार रहते हैं। ऐसे में शिकारियों के उल्लू के पकड़ने, अवैध रूप से कब्जे में रखने और व्यापार करने की आशंका रहती है।

कछुआ और दो मुंहवाला सांप से जुड़ा अंधविश्वास

भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ विपुल मौर्य बताते हैं कि वन्यजीवों से जुड़े कई अंधविश्वास हैं। हालांकि जागरूकता बढ़ने और वन महकमे की सख्ती के साथ ही इसमें कमी आई है। पर अगर अंधविश्वास की बात करें तो उल्लू की तरह कछुआ से जुड़ा एक अंधविश्वास और भी है। इसमें माना जाता है कि कुछ खास तरह के कछुआ की पूजा की जाए, तो धन की बढ़ोतरी होती है। इसी तरह दो मुंह वाला सांप (रेडसेंड बोआ) जो विषैला नहीं होता है, उसके बारे में भी माना जाता है कि यह जिसके पास होगा, उसके पास धन संपदा की कमी नहीं होगी। वर्ष-2013 हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन के पास तस्करों से ऐसा ही सांप पकड़ा गया था।

डर दूर होने की बात

इसके अलावा कई और तरह के विश्वास भी है। इसमें बाघ और तेंदुआ का नाखून-दांत को पहनने से डर दूर होने की बात कही जाती है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के उत्तराखंड के सीनियर फील्ड ऑफिसर राजेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि यह सब भ्रांति है, इन सबसे कुछ नहीं होता है।

 

 


Share Now