पत्रकार संगठन NUJ ( नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ़ जर्नीलिस्टस ) के ऊधमसिंह नगर जिला अध्यक्ष दामोदर लाल शर्मा को पुलिस नें 5 लाख की अफीम के साथ किया गिरफ्तार। पत्रकार संगठन भी शक के घेरे में।

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हरिद्वार से संचालित पत्रकार संगठन नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ़ जर्नीलिस्टस ( NUJ ) उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिला इकाई के जिलाध्यक्ष दामोदर लाल शर्मा व उसके साथी नवल किशोर को ऊधम सिंह नगर पुलिस नें 5 लाख की अफीम के साथ कल गिरफ्तार किया। दामोदर लाल शर्मा को मई 2024 में NUJ उत्तराखंड पत्रकार संगठन का उधमसिंह नगर जिले का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। जहाँ मौके पर संगठन के संस्थापक और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र भट्ट सहित वर्तमान में संगठन की प्रदेश अध्यक्ष और तत्कालीन नैनीताल जिला इकाई की अध्यक्ष दया जोशी सहित कई पत्रकार मौजूद थे।

संगठन द्वारा बड़े जोर शोर से इसका अपने तथाकथित पोर्टलों में प्रकाशन भी किया था हालांकि पुलिस द्वारा दामोदर लाल शर्मा को अफीम बेचने के आरोप में गिरफ्तार करने के बाद अब संगठन अपना पल्ला झाड़नें की हर संभव कोशिश भी कर रहा है जहाँ उसे अब अपने वट्सअप ग्रुपो से हटाया गया तो वहीं अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि जल्द ही एक बैठक भी बुलाई जा सकती है। पर इस संगठन पर पूर्व में भी कई आरोप हमनें सबूतों के साथ लगाए थे कि ये संगठन बस पत्रकारिता की आड़ में सूचना विभाग से फर्जी बिलो के माध्यम से पैसे ले रहा है वहीं कई सुविधाएं जैसे सरकारी वाहन की सुविधा व अन्य सरकारी संसाधनों का उपयोग अपने निजी कामों के लिए कर रहा है।

दामोदर लाल सहित एक और युवक को पुलिस नें किया गिरफ्तार।

बता दें कि दामोदर लाल शर्मा जो पत्रकारिता की आड़ में संधू ढाबा चलाता था उसके एक और साथी नवल किशोर जो वहीं से ट्रक, बस ड्राइवरों व अन्य लोगों को अफीम बेचने का भी धंधा चला रहा था को बाजपुर पुलिस व ANTF की टीम नें बाजपुर दोराहा स्तिथ संधू ढाबे से मय 1.321 किलो अफीम जिसकी अनुमानित लागत तक़रीबन 5 लाख बताई जा रही है गिरफ्तार किया।

उठ रहे हैं कई सवाल किसकी शय पर बिकता था नशा?

पुलिस द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार दामोदर लाल शर्मा व उसका साथी नवल किशोर पत्रकारिता की आड़ में नशा बेचने का धंधा चला रहे थे वहीं अब सवाल ये भी खड़ा हो रहा है क्या दामोदर लाल शर्मा जो मई 2024 से पहले कहीं सुर्खियों में नहीं था और केवल पत्रकारिता के पेशे में था तो कहीं मई 2024 में NUJ उत्तराखंड पत्रकार संगठन का जिलाध्यक्ष बनने के बाद और संगठन की शय पर तो इस नशे के कारोबार में नहीं उतरा। क्या पत्रकार संगठन के कुछ शीर्ष नेता तो उसे संरक्षण नहीं दे रहे थे? क्या पत्रकार संगठन नें उन्हें जिलाध्यक्ष बनाने से पूर्व उनकी पूरी जाँच पड़ताल की थी? और सवाल ये भी उठता है कि सरकार ऐसे पत्रकार संगठनों जो कि किसी भी व्यक्ति को पत्रकार बनाकर अपनी सदस्यता मानको को पूरा कर सरकारी विभागों और नेताओं के समक्ष अपना शक्ति प्रदर्शन करते हैं की जाँच क्यों नहीं की?

कालनेमी पत्रकारों व पत्रकार संगठनों की भी  हो जाँच

हालांकि धामी सरकार नें जिस तरह ऑपरेशन कालनेमी चला कर धर्म के साथ खिलवाड़ करने वाले और लोगों को ठगने वाले फर्जी बाबाओं के खिलाफ अभियान चला रखा है वैसे ही अब धामी सरकार को पत्रकारिता की आड़ में नशा बेचने वालों, अवैध धंधा करने वालों तथाकथित पत्रकारों सहित उन पत्रकार संगठनों से जुड़े सभी सदस्यों की वास्तविक सदस्यता की जांच करनी चाहिए। और वर्तमान में तथाकथित कालनेमी पत्रकारों व पत्रकार संगठनों के खिलाफ भी एक ऑपरेशन चलाना चाहिए। जो संगठन दिखावे के लिए पत्रकार हितों की बात करते हैं पर वास्तविकता में अपने फर्जी सदस्य बना कर उसकी आड़ में सरकारी सुविधाओ की मलाई चाट रहे हैं।


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