
रुद्रपुर के केसरपुर का रहने वाले अरोड़ा परिवार का एक लड़का जो खुद 30-32 साल का है और जिसने अपने जुए के मकड़ जाल में रुद्रपुर और आस पास के ना जाने कितने बड़े घरानो के युवाओं को अपनी “आवाज” पर जुए की पहले लत लगाई और फिर जब वो इस मकड़ जाल में फस गए तो कुछ परिवार तो इसमें बर्बाद हो गए और कुछ नें अपनी जान तक गंवा दी है।

सूत्रों के हवाले से रुद्रपुर व आस पास के क्षेत्रों के कई युवा इस गैम्बलर के शिकार हो चुके हैं और कई अभी भी इसके मकड़जाल में फसे हुए हैं। और शहर के लोगों की दबी जुबान पर इस युवा गैम्बलर का नाम है। पर वहीं लोगों का यह भी कहना है कि इस गैम्बलर के तार पुलिस विभाग के कई अधिकारीयों से भी जुड़े हैं इसीलिए कब्र से भी गुनहगार को ढूंढ लाने वाली उत्तराखंड पुलिस इस गैम्बलर की तरफ आँखे बंद करे हुए है।
क्या है “आवाज” ?
जुए की दुनियाँ में आवाज एक ऐसा कोड वर्ड है जिसमें बड़े बड़े कैसीनो में जुआ खेलने वाले लोग जब या तो बहुत कुछ हार चुके होते हैं या उनके पास पैसा खत्म हो जाता है तो उन्हें कुछ गेम्बलर्स के क्रेडिट ( आवाज ) पर और जुआ खेलने का मौका मिल जाता है। और खेल फिर इस तरह खेला जाता है कि वो जुआ खेलने वाला युवा क्रेडिट ( आवाज ) के पैसे भी हारने के बाद इन गेम्बलर्स का शिकार बन जाता है और फिर ऐसे युवाओं को बार बार प्रताड़ित कर इनकी घर और जमीने भी बिकवा ली जाती हैं। ऐसी ही एक आवाज ( क्रेडिट ) रुद्रपुर के इस गेम्बलर द्वारा ऊधम सिंह नगर और आस पास के जिलों के कई प्रभुत्व वर्ग के 20-25 साल के युवाओं को दी जाती है और ये सारा खेल गोवा के बड़े बड़े कैसीनो में खेला जाता है।
युवाओं को कैसे फसाता है अपने जाल में ये गैम्बलर?
सूत्रों के अनुसार रुद्रपुर का ये गैम्बलर शहर के कई कई युवाओं को पहले शेयर मार्किट में सट्टा लगवाकर उन्हें जीत का जाम पिलाता है और फिर शुरू होता है असली खेल जिसमें इन बड़े घर के युवाओं को गोवा घुमाने के बहाने अपने सैट कैसीनो में ले जाकर शराब और शराब की चकाचोध का आदि बनाकर जुए की टेबलों पर बिठा दिया जाता है जहाँ पहले तो ये युवा जीतते हैं और फिर जीत के नशे में चूर ये युवा कब इन गैम्बलर्स के जाल में फसते हैं उन्हें भी पता नहीं चलता और धीरे धीरे वो पहले 1-2 लाख और फिर धीरे धीरे इन गैम्बलर्स की “आवाज” पर लाखों और करोड़ों रुपए तक हार जाते हैं और फिर इन गैम्बलर्स के द्वारा इनको इस हद तक मजबूर किया जाता है कि इनके परिवार वालों को अपना घर और जमीने भी बेचनी पड़ जाती हैं।
कई बन चुके हैं शिकार।
सूत्रों की माने तो रुद्रपुर के इस गैम्बलर नें रुद्रपुर सहित आस पास के शहरों के कई बड़े व्यापारियों के लड़को को अपना शिकार बनाया है जिसमें बाजपुर के 2 लड़को और रुद्रपुर के कई लड़के शामिल हैं। वहीं बताया तो यहाँ तक जा रहा है कि अभी 7-8 महीने पहले ही इस गैम्बलर नें जहाँ हल्द्वानी के कुछ रसूखदारो के बच्चों को अपने जाल में फ़सा कर उनसे कई करोड़ों रूपये लूट लिए और फिर हालात यहाँ तक पहुँचे कि इस गैम्बलर को उन लड़को के परिवार वालों के क्रोध का सामना करना पड़ा और तभी से ये गैम्बलर अपने साथ बाउंसर लेकर घूमने लगा है। शहर के ही एक कपड़ा व्यापारी और एक प्रसिद्ध फार्म हाउस के मालिक के बेटे को भी इसी गैम्बलर नें अपने मकड़जाल में फ़सा कर कई लाख रूपये वसूले और फिर शहर के कुछ प्रभुत्व वर्ग के लोगों की पंचायत में ये मामला सुलझा।
कहाँ कहाँ है नेटवर्क।
रुद्रपुर के इस गैम्बलर का नेटवर्क जहाँ जुए के धंधे में गोवा और नेपाल तक फैला हो वहीं उत्तराखंड पुलिस की SOG और कुछ आलाधिकारीयों से भी इसके तार जुड़े हैं जो मूकदर्शक बन कर जिले में फैल रहे जुए के हाई फाई सकेंडल से अपनी जेबें भर रहे हैं। वहीं मामला बिगड़ने पर शहर के ही इस युवक के कुछ प्रभुत्व वर्ग के रिश्तेदार इसको बचाने की अहम भूमिका भी निभाते हैं।
सवाल खड़ा होता है आँखिर क्यों शहर के पैसे वाले लोग अपने घर के युवाओं को इस दलदल में फसने के बाद पुलिस का सहारा नहीं लेते क्यों आपसी पंचायतो में इसका फैसला कर अपनी झूठी शान को बचाने की कोशिश करते हैं जिसका परिणाम है कि एक के बाद एक युवाओं की मौते इस शहर में हो रही हैं। और पुलिस भी बिना किसी की तहरीर के इस गैम्बलर को छोड़े बैठी है।
पर सवाल उन लोगों पर भी उठता है जो अपने जवान बेटे की मौत के असली दोषियों को अपनी बदनामी के डर से बचाते आ रहे हैं और जिसका फायदा ये होता है कि ये गैम्बलर फिर एक नए शिकार को अपने जाल में फसाने में लग जाता है। और फिर एक प्रभुत्व वर्ग के घर का चिराग या तो बुझ जाता है या फिर एक पंचायत में ये गैम्बलर अपनी जेब भर कर नए शिकार पर निकल जाता है। और ऐसे सिलसिलेवार गैमबलिंग से महज 7-8 सालों में इस गैम्बलर नें अकूत संपत्ति जुटा ली और शहर के कई युवाओं का नाम या तो उन बड़े बड़े कैसीनो में अंकित है या फिर मौत के रजिस्टर पर अंकित हो चुका है।

