प्रभारियों की तैनाती के सभी आदेश अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी के नाम से जारी हुए हैं। इनमें अकाउंट कर्मचारी सतीश कुमार को नगर पालिका महुआखेड़ागंज में प्रभारी ईओ, कर अधीक्षक हेमंत कुमार गुप्ता को नगर पंचायत लंढौरा में, निदेशालय में अटैच चल रहे मुख्य सफाई निरीक्षक गुरमीत सिंह को नगर पंचायत लंढौरा में, टैक्स वसूली कर्मचारी रोशन सिंह पुंडीर को नगर पालिका गौचर में, कर निरीक्षक तारिक खान को नगर पालिका टिहरी, कर निरीक्षक सरोज गौतम का नगर पंचायत नानकमत्ता, कर निरीक्षक पूजा को नगर पालिका बाजपुर, क्लर्क अंकित राणा को नगर पंचायत पिरान कलियर, क्लर्क कुलदीप चौहान को नगर पंचायत ढंडेरा, कर निरीक्षक यशवीर सिंह को नगर पंचायत तपोवन, अकाउंट कर्मचारी दीपक बुडलाकोटि को नगर पालिका कालाढूंगी, क्लर्क भरत पंवार को नगर पालिका देवप्रयाग, क्लर्क कुलदीप नैथानी को नगर पंचायत ऊखीमठ, अकाउंट कर्मचारी राकेश कोटिया को नगर पंचायत जसपुर, सफाई निरीक्षक कुसुम मटूडा को नगर पालिका उत्तरकाशी, क्लर्क वासुदेव डंगवाल को नगर पंचायत चमियाला, कर निरीक्षक पंकज सिंह को नगर पंचायत लालकुआं, कर निरीक्षक प्रेम सिंह रावत को नगर पालिका बड़कोट में प्रभारी ईओ बना दिया गया है।
जो पूरे कॅरिअर में नहीं बन सकते, उन्हें सीधे बना दिया ईओ
सफाई निरीक्षक अपने कॅरिअर की सभी पदोन्नति लेने के बाद भी कभी अधिशासी अधिकारी नहीं बन सकते। दूसरी बार, शहरी निकायों में ईओ की भर्ती उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है। लिहाजा, सवाल उठ रहे हैं कि शहरी विकास विभाग ने नियमों का दरकिनार कर सफाई निरीक्षकों को ये जिम्मेदारी सौंप दी। उत्तर प्रदेश के 2017 के आदेश के अनुसार ईओ का प्रभार केवल एसडीएम स्तर के अधिकारी को ही दिया जा सकता है। उत्तराखंड में भी इसका अनुपालन होता रहा है। उत्तराखंड स्थानीय निकाय(केंद्रीकृत) सेवा नियमावली 2019 के तहत ईओ पद पर नियुक्ति पदोन्नति(सात-आठ वर्ष की सेवा या वरिष्ठता) या आयोग के माध्यम से होनी चाहिए।
हाईकोर्ट भी दे चुका आदेश
दो मई 2025 को नैनीताल हाईकोर्ट ने निकायों में कर्मचारियों की कमी, प्रभारी व्यवस्था पर अहम फैसला सुनाया था। न्यायालय ने सचिव शहरी विकास को याचिकाकर्ता अनु पंत की याचिका पर चार माह के भीतर निर्णय का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश के अधिकांश निकायों में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी, कर संग्राहक, सफाई निरीक्षक और सहायक लेखाकार जैसे जिम्मेदार पदों का प्रभार सौंपा गया है। इस व्यवस्था से निकायों का कामकाज और आम जनता को मिलने वाली बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। राज्य सरकार के पक्ष और सभी पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए हाईकोर्ट ने सचिव शहरी विकास को इस संबंध में आदेश दिया था।
ये व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है। जो पूर्व में प्रभारी ईओ रहे हैं, उन्हीं को ईओ बनाया गया है। हमारे पास ईओ के पद रिक्त हैं। इस कारण ये तैनातियां की गई हैं।